रजरप्पा मन्दिर के दर्शन

जमशेदपुर शहर के बाद अगले दिन हमारी प्लानिंग रजरप्पा स्थित माँ छिन्नमस्तिके मंदिर घुमने की थी. मंदिर तय समय पर पहुंच जाए, इसके लिए हमलोग रात 3 बजे ही अपनी अलग अलग दो गाड़ियों में बैठकर रजरप्पा के लिए रवाना हो गए. एक तो दिसम्बर का वो सर्द महीना और ऊपर से रात के आखिरी पहर में लंबे सफ़र...

जमशेदपुर शहर की सैर

यूँ तो गुजरात, सिक्किम, उड़ीसा, महाराष्ट्र, उत्तरप्रदेश सहित देश के कई हिस्सों में अपनी उपस्थिति दर्ज करा ली है, पर अपने पड़ोसी राज्य झारखंड की खूबसूरती के दीदार से अभी तक वंचित था. हालांकि धनबाद, रामगढ़ जैसे शहरों में आना जाना हुआ, राउरकेला यात्रा के दौरान भी रांची रेलवे स्टेशन पर कुछ घंटे बिताया पर कभी मुसाफिर बन कर...

विन्ध्याचल यात्रा, बनारस भ्रमण भाग-4

वाराणसी में रहते हुए वक़्त मानों रेत की मानिंद हाथ से फिसलता जा रहा था और छुट्टियाँ भी ख़त्म होने वाली थी. इस दौरान अब तक शहर के अधिकांश दर्शनीय स्थलों के दर्शन हो चुके थे. बस विन्ध्याचल की यात्रा बाकी रह गयी थी. विन्ध्याचल बनारस से 65 किलोमीटर की दुरी पर है. कहा गया की अगर यहां चलना...

सारनाथ… भगवान बुद्ध की प्रथम उपदेश स्थली

बनारस प्रवास के दौरान इतने दिनों में शहर और यहां के रास्तों से थोड़ी बहुत जान पहचान होने लगी थी. वाराणसी में हमारे कई रिलेटिव्स रहते हैं, यहां तेलियाबाग़ और विशेश्वरगंज में रहने के दौरान शहर के चौक-चौराहे, गलियों, मंदिरों और गंगा घाटों के इतने चक्कर लगाए कि अब बनारस हमारे लिए अजनबी शहर बिलकुल भी नहीं रह गया...

बनारस भ्रमण भाग-2 रामनगर किला, बीएचयू और अस्सी घाट

बनारस भ्रमण...मंदिरों और घाटों के दर्शन  के बाद अगले दिन हमलोगों ने रामनगर किला की ओर रुख किया. वाराणसी शहर से यह 14 किलोमीटर की दूरी पर गंगा के पूर्वी किनारे पर स्थित है. यहां महाराजा काशी का किला है जिसका निर्माण काशी नरेश महाराजा बलवंत सिंह ने 1750 ई. में करवाया था. बाइक और स्कूटी से हमलोगों का...

बनारस भ्रमण… मंदिरों और घाटों के दर्शन

कई बार सफ़र का संयोग अचानक ही बन जाता है. यात्राओं की योजनायें बनानी नहीं पड़ती, बल्कि ये किस्मत से हमें मिलती हैं और फिर रह जाती है हमारी यादों में ताउम्र यादगार बन कर. पटना से बनारस का ये सफ़र भी कुछ ऐसा ही था. जब तक दैनिक जागरण, पटना में रहा, तो न जाने कितनी दफा भाऊ...

पहाड़ों की गोद में बसा शहर राउरकेला

राउरकेला एक ऐसा शहर जहां हर सुबह सूर्य अंगराई लेता हुआ पहाड़ों की ओट से निकलता है, दिन भर झरनों, नदियों की जलधाराओं के बीच चमकता-दमकता है, और फिर शाम होते ही जा छुपता है वापस उन्ही पहाड़ियों के पीछे. प्रकृति की खूबसूरती यहां चारों ओर बिखरी पड़ी है. राउरकेला पहाड़ियों और नदियों के बीच बसा है. ग्रीन सिटी होने...

वलसाड़: समुंद्री किनारे,मंदिर,किले और अल्फांसों आम का शहर

दमन का खुबसूरत सफ़र तय कर सूरत लौटने में ही हमें रात हो गयी. फिर अगले दिन सूरत से वलसाड़ के लिए निकलना था. सुबह सूरत स्टेशन पहुंचे तो टिकट के लिए सारे काउंटर पर लम्बी लाइन लगी थी. फिर जब स्टेशन के अन्दर आये तो एक प्लेटफार्म के नीचे पटरियों पर नजर पड़ी. पटरियों के नीचे का फर्श...

सागर की लहरों से भींगता जहां तन –मन, चलो घूम आएं वो दमन..

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पिछले पोस्ट यानि गुजरात यात्रा के छठें पड़ाव में आपने हमारी वांकानेर और सूरत भ्रमण के बारे में पढ़ा. अब सूरत से हमलोग अपनी यात्रा को विस्तार देते एक दिन के लिए सुबह-सुबह दमन के लिए निकले. निकलते वक़्त सुबह तेज बारिश होने लगी थी. पहली बार सूरत की बारिश का मजा लेने का मौका मिला. गाड़ी की खिड़की...

कुछ दिन गुजरात में (यात्रा का छठा पड़ाव) वांकानेर और सूरत शहर की सैर

द्वारिका घुमने के बाद ओखा-अहमदाबाद पैसेंजर ट्रेन से सुबह सात बजे के करीब वांकानेर स्टेशन उतरे. वांकानेर गुजरात में राजकोट जिले का एक शहर है. वांकानेर का नामाकरण इसके स्थान के नाम पर हुआ है. मच्छु नदी के पानी जिसे ‘नेर’ कहते हैं, उसके मोड़ यानि ‘वांका’ पर स्थित होने के कारण इस शहर को ‘वांकानेर’ कहा जाता है....