सारनाथ… भगवान बुद्ध की प्रथम उपदेश स्थली

बनारस प्रवास के दौरान इतने दिनों में शहर और यहां के रास्तों से थोड़ी बहुत जान पहचान होने लगी थी. वाराणसी में हमारे कई रिलेटिव्स रहते हैं, यहां तेलियाबाग़ और विशेश्वरगंज में रहने के दौरान शहर के चौक-चौराहे, गलियों, मंदिरों और गंगा घाटों के इतने चक्कर लगाए कि अब बनारस हमारे लिए अजनबी शहर बिलकुल भी नहीं रह गया...

बनारस भ्रमण भाग-2 रामनगर किला, बीएचयू और अस्सी घाट

बनारस भ्रमण...मंदिरों और घाटों के दर्शन  के बाद अगले दिन हमलोगों ने रामनगर किला की ओर रुख किया. वाराणसी शहर से यह 14 किलोमीटर की दूरी पर गंगा के पूर्वी किनारे पर स्थित है. यहां महाराजा काशी का किला है जिसका निर्माण काशी नरेश महाराजा बलवंत सिंह ने 1750 ई. में करवाया था. बाइक और स्कूटी से हमलोगों का...

बनारस भ्रमण… मंदिरों और घाटों के दर्शन

कई बार सफ़र का संयोग अचानक ही बन जाता है. यात्राओं की योजनायें बनानी नहीं पड़ती, बल्कि ये किस्मत से हमें मिलती हैं और फिर रह जाती है हमारी यादों में ताउम्र यादगार बन कर. पटना से बनारस का ये सफ़र भी कुछ ऐसा ही था. जब तक दैनिक जागरण, पटना में रहा, तो न जाने कितनी दफा भाऊ...

पहाड़ों की गोद में बसा शहर राउरकेला

राउरकेला एक ऐसा शहर जहां हर सुबह सूर्य अंगराई लेता हुआ पहाड़ों की ओट से निकलता है, दिन भर झरनों, नदियों की जलधाराओं के बीच चमकता-दमकता है, और फिर शाम होते ही जा छुपता है वापस उन्ही पहाड़ियों के पीछे. प्रकृति की खूबसूरती यहां चारों ओर बिखरी पड़ी है. राउरकेला पहाड़ियों और नदियों के बीच बसा है. ग्रीन सिटी होने...

वलसाड़: समुंद्री किनारे,मंदिर,किले और अल्फांसों आम का शहर

दमन का खुबसूरत सफ़र तय कर सूरत लौटने में ही हमें रात हो गयी. फिर अगले दिन सूरत से वलसाड़ के लिए निकलना था. सुबह सूरत स्टेशन पहुंचे तो टिकट के लिए सारे काउंटर पर लम्बी लाइन लगी थी. फिर जब स्टेशन के अन्दर आये तो एक प्लेटफार्म के नीचे पटरियों पर नजर पड़ी. पटरियों के नीचे का फर्श...

सागर की लहरों से भींगता जहां तन –मन, चलो घूम आएं वो दमन..

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पिछले पोस्ट यानि गुजरात यात्रा के छठें पड़ाव में आपने हमारी वांकानेर और सूरत भ्रमण के बारे में पढ़ा. अब सूरत से हमलोग अपनी यात्रा को विस्तार देते एक दिन के लिए सुबह-सुबह दमन के लिए निकले. निकलते वक़्त सुबह तेज बारिश होने लगी थी. पहली बार सूरत की बारिश का मजा लेने का मौका मिला. गाड़ी की खिड़की...

कुछ दिन गुजरात में (यात्रा का छठा पड़ाव) वांकानेर और सूरत शहर की सैर

द्वारिका घुमने के बाद ओखा-अहमदाबाद पैसेंजर ट्रेन से सुबह सात बजे के करीब वांकानेर स्टेशन उतरे. वांकानेर गुजरात में राजकोट जिले का एक शहर है. वांकानेर का नामाकरण इसके स्थान के नाम पर हुआ है. मच्छु नदी के पानी जिसे ‘नेर’ कहते हैं, उसके मोड़ यानि ‘वांका’ पर स्थित होने के कारण इस शहर को ‘वांकानेर’ कहा जाता है....

कुछ दिन गुजरात में यात्रा का पांचवा पड़ाव (द्वारिका भ्रमण) भाग- दो

द्वारिका दर्शन कराने वाले बस से अब हमें रुक्मणी मंदिर, गोपी तालाब, भगवन शिव के बारह ज्योतिर्लिंग में से एक नागेश्वर ज्योतिर्लिंग मंदिर और बेट/भेंट द्वारिका घुमने जाना था. वापस तीन बत्ती चौक पर आये तो देखा कि यहाँ बस लगी हुई है. खुलने में अभी थोड़ा वक़्त था इसलिए हमलोगों ने पास के एक दूकान से गर्मी दूर...

कुछ दिन गुजरात में (यात्रा का पांचवां पड़ाव) भाग- एक

द्वारिका गुजरात के जामनगर जिले में पड़ता है. यहां हमलोग तीन बत्ती चौराहे के पास मिलन होटल में ठहरे थे. शाम में तैयार होकर करीब साढ़े सात बजे द्वारिका भ्रमण के लिए निकले. तय हुआ कि घूमकर लौटते वक़्त ही उधर से डिनर करते आना है. हालांकि द्वारिका शहर हमलोग के लिए नया था, लेकिन भगवान कृष्ण की यह नगरी...

गिर के जंगल में सिंह से सामना

सोमनाथ मंदिर के दर्शन कर जब रात में हमलोग लौट रहे थे, तभी होटल कैंपस में मौजूद एक टूर एंड ट्रेवल्स वाले से जीजू ने आगे की यात्रा के लिए बात कर ली. जिसे सुबह आठ बजे इंडिका कार से हमलोगों को गिर जंगल और पोरबंदर घुमाते हुए द्वारिका ले जाने वाला था. 5000 में यह बुकिंग तय हुई. सुबह आठ बजे...