बचपन से सुनता आ रहा हूं की यात्रा हमें काफी कुछ सिखाती है, दिखाती है और अलग अलग भाषा, परिवेश, संस्कृति से जान पहचान भी कराती है. लोगों की इन बातों का मुझ पर इतना गहरा असर पड़ा कि मेरी भी घुमक्कड़ी चालू हो गयी. अपने सफ़र के दौरान देश के कई प्रसिद्ध मंदिरों का दर्शन किया, बौद्ध स्तूपों और गुरूद्वारे में मत्था टेका, ऊँचे दुर्गम पहाड़ों की चढ़ाई की तो चारों ओर बिछे बर्फ के चादरों पर फिसलने का मजा लिया. हालांकि सफ़र का मतलब तब मैंने सिर्फ घूमना फिरना ही समझा था. इस बात से अनजान की यात्रा रिश्तों को भी जीना सिखाती है. कैसे बिना देखे आप किसी के साथ एक सूत्र में जुड़ जाते हैं, बिना किसी पूर्व परिचय के सिर्फ एक छोटी मुलाकात आपस में एक संबंध कायम कर देती है, आभासी दुनिया से शुरू हुआ जान पहचान का यह सिलसिला वास्तविक रिश्तों के बंधन से बंध जाता है. और फिर उन्हीं परिजनों से मिलने हम निकल पड़ते है एक अनजाने शहर की ओर…

अपने देश में कई ऐसे लोग है जो हर साल ऐसी एक यात्रा जरुर करते हैं.  जहां उनकी मुलाकात वैसे लोगों से होती है जिनसे वो वर्चुअल दुनिया के जरिये जुड़े थे. #SSFB एक ऐसी ही सबसे अलग, अनोखी और बड़ी फैमिली है, जिसके सदस्य इन्टरनेट के संसार से बाहर निकल कर सचमुच के रिश्तों को जीने लगे हैं. इस परिवार के मुखिया पत्रकार संजय सिन्हा हैं. रिश्तों के जादूगर कहलाने वाले संजय सिन्हा जी पुस्तक और अपनी कहानियों के जरिये लोगों के बीच रिश्तों का महत्त्व बताने में जुटे हैं. इन्होने #FACEBOOK मित्रों को भी अपना परिवार माना और हर साल अपने उस परिवार को एक कड़ी में जोड़े रखने के लिए संजय सिन्हा फेसबुक फैमिली मिलन समारोह का आयोजन करते हैं. सबसे पहले साल 2014 में दिल्ली में इसकी शुरुआत हुई फिर मथुरा, और जबलपुर के बाद रिश्तों का यह महामिलन अब बिहार की राजधानी पटना में होने जा रहा है. आगामी 12 नवंबर को होने वाला यह मिलन #SSFB परिवार का चौथा संस्करण है. जिसमें शामिल होने के लिए परिवार का हर सदस्य उत्साहित है और तैयारियों में लगा है.

रिश्तों को जीने वाले संजय सिन्हा पटना के इस कार्यक्रम की जानकारी देते हुए अपने फेसबुक वाल पर लिखते हैं कि एक दिन निकालिए अपने लिए, अपनों के लिए. उन रिश्तों के लिए जिन्हें आपने खुद चुना है. यह कार्यक्रम आपका है, आप ही इसके मेजबान भी हो और मेहमान भी.

समारोह में शामिल होने की दुविधा को लेकर कहते हैं कि फेसबुक फ्रेंड से लेकर फॉलोवर सब आ सकता है, सीमा मार्क जुकरबर्ग ने तय की है, संजय सिन्हा ने नहीं. संजय सिन्हा का संसार बहुत बड़ा है. उनके सीने में मां का दिल धडकता है…

पटना में होने वाले कार्यक्रम की जानकारी देते हुए संजय आगे लिखते हैं उस दिन सुबह दस बजे से देर रात तक आप हमारे साथ रहेंगे, हम साथ साथ नाश्ता करेंगे, खाना खायेंगे, बातें करेंगे,नाचेंगे और फिर रात का खाना खायेंगे फिर जुदा हो जायेंगे अगले साल फिर मिलने का वादा करते हुए. मेरा दावा है कि आप बेशक वहां आयेंगे अकेले,पर जायेंगे कई रिश्तों को संग लेकर. आप जायेंगे प्यार में डूब कर…

दिनभर चलेगा मुलाकातों और मस्ती का दौर

कार्यकम 12 नवम्बर को पटना म्यूजियम के पीछे आर्ट कॉलेज के पास लेडी स्टीफेंस हॉल में आयोजित है. जहां  सुबह 8:30 बजे से मिलन समारोह में आने वाले परिजनों का सबसे पहले रजिस्ट्रेशन होगा और नास्ते का प्रबंध रहेगा. दस बजे पौधारोपण कार्यक्रम किया जायेगा उसके बाद संजय सिन्हा जी के स्वागत भाषण और केशव त्योहार के गानों से समारोह की शुरुआत होगी. दोपहर में कार्यक्रम अपने कई चरणों से गुजरता रहेगा उस वक़्त परिजन भोजन का भी आनंद साथ में ले सकेंगे. बिहार के बाहर से आने वाले लोगों के लिए यहां का प्रसिद्ध लिट्टी चोखा भी भोजन में शामिल है. दोपहर के खाने के पश्चात् जबलपुर की इशिता मधुर तान छेड़ेंगी और इसके साथ ही कार्यक्रम अगले चरण में प्रवेश करेगा. फिर #ssfb के सभी परिजन साथ बैठ कर शाम की चाय पियेंगे. इसके बाद कार्यक्रम का तीसरा पड़ाव शुरू होगा. इस तरह रात 9 बजे तक #ssfb परिवार रिश्तों की जादूगरी में सराबोर रहेगा और अंत में रात का भोजन कर एक दुसरे से विदा लेंगे.

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